Sunday, March 23, 2025

किसलय अपहरण कांड 2005 बिहार, पटना

 "मेरा किसलय कहाँ हैउसे लौटा दो!"

दैनिक जागरण ने अपने पिछले 25 वर्षों के पुनावरलोकन के क्रम में एक खबर प्रकाशित की है, जिसका शीर्षक है "मेरा किसलय कहाँ है, उसे लौटा दो!"!

यह मामला 18 जनवरी 2005 का है, जब पटना के डीपीएस स्कूल में पढ़ने वाले छात्र किसलय का स्कूल जाने के क्रम में अपहरण कर लिया गया था जिसके बाद किसलय के सहपाठियों और अन्य छात्रों ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ ऐ पी जे अब्दुल कलाम को पत्र लिखा था,  तथा प्रतिदिन बिहार के विभिन्न समाचार पत्रों में इसके विरूद्ध प्रदशन की तसवीरें प्रमुखता से छापा था  और तभी 27 जनवरी 2005 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने चुनाव प्रचार के क्रम में पटना के गाँधी मैदान से "मेरा किसलय कहाँ है, उसे लौटा दो!" हाथ जोड़कर यह अपील की थी जिसके बाद भीड़ भावुक हो गयी थी, तत्कालीन राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बाद जब यहाँ के राजपाल बूटा सिंह जी ने पटना के वरिष्ठ एसएसपी नयैर हसनैन खान को प्रतिदिन राजभवन में जाकर इस केस के अपडेट देने का निर्देश दिया था तब जाकर इसके चार दिनों बाद और कुल 13 दिनों तक अपहृत रहने के बाद किसलय को सकुशल छुड़ा लिया गया था


इसी तरह 20 सितम्बर 2005 को एक अन्य 9 वर्षीया छात्र गौरव उर्फ़ गोलू का अपहरण कर लिया गया था जिसके बाद पटना हाई कोर्ट द्वारा इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार सरकार और प्रशासन को यह फटकार लगाई थी की पिछले दस सालों में 1111 लोगों का अपहरण का मामला दर्ज़ हो चूका है, "जड़ से मिटा दें अपहरण करने वालों का नामोनिशान"! गोलू के मामले में हाईकोर्ट ने पटना प्रशासन को यह निर्देश दिया था 17 अक्टूबर 2005 तक हर हाल में गोलू को सकुशल छुड़ा कर कोर्ट को सूचित किया जाये जिसके बाद और हाई कोर्ट में सुनवाई के एक दिन पहले 16 अक्टूबर 2005 को ही गोलू को पटना से मात्र 15 किलोमीटर की दुरी पर हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर अपहणकर्ताओं ने गोलू को ट्रैन से उतार दिया था और भाग गए थे


इन दोनों खबरों पर गौर से ध्यान देने पर यह पता चलता है कि दवाब तो पटना एसएसपी पर डाला जा रहा था और उन्हें प्रतिदिन राजभवन तलब किया जा रहा था
या फिर गोलू के केस के सिलसिले में,  हाईकोर्ट तो बिहार प्रशासन को सुनवाई के लिए बुला रहा था और उस पर दवाब बना रहा था, तो इससे अपहरणकर्ता किस तरह से घबरा रहे थे? और किसलय या गोलू को छोड़ दे रहे थे? ऐसा क्या रिश्ता था उस वक्त प्रशासन और अपहणकर्ताओं के बीच जो एक जगह दवाब देने से दूसरी जगह से आउटपुट निकलता था? यह एक गंभीर प्रश्न है जिसका शायद ही उत्तर मिले  गोलू और किसलय तो भाग्यशाली थे कि उन्हें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और हाईकोर्ट का सहारा मिला था, क्या बिहार बाकी बच्चे और नागरिक उस वक़्त उसी तरह से भाग्यवान थे जिनको किसी बड़े हस्ती का सपोर्ट मिलता, हज़ारों लोगों ने उस काल में जैसे-तैसे पैसों को जोड़कर अपहरकर्ताओं को देकर अपनी जान बचाई थी, उस काल को याद करके आज भी सिहरन सी होती है!

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